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*प्राथमिक विद्यालयों की जर्जर व्यवस्था को सभी ने किया गौर लेकिन क्या हकीकत किसी ने जाना

*शिक्षा स्तर पर विशेष✍✍✍*

*सुरेन्द्र सिंह कछवाह चकजाफ़र कर्वी चित्रकूट✍✍*

*शिक्षा के क्षेत्र में हमारा पहला गुरु प्राथमिक विद्यालय है क्या कभी किसी ने दुबारा मुड़ कर देखा कि हमारा गुरु किस हालात में है*

*हम आप सभी को एक छोटी सी पोस्ट के सहारे ये बताना चाह रहे हैं, कि क्या हमने कभी अपने दायित्वों का निर्वाहन किया ?*

*क्या हमने कभी अपने गुरु(प्राथमिक विद्यालय) को गुरु दक्षिणा दिया ?*

हम एक ऐसे समाज मे रहते हैं जिसमे गुरु को सर्वोपरि स्थान दिया जाता है ।लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या हम सच मे अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं ?
सर्वविदित है कि जब हम इस संसार मे जन्म लेते है तब हमारे माता पिता हमे इस संसार से अवगत कराने का प्रयास करते है ,हमे चलना ,फिरना ,दौड़ना सिखाते है ,यानी हमारे माता पिता प्रथम गुरु का पूरा कार्य करते है ।लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में जैसे ही हम प्रवेश करते हैं हमारे माता पिता हमारा दाखिला *प्राथमिक विद्यालय* में कराते हैं , तब प्राथमिक विद्यालय ही हमारा प्रथम गुरु माना जाता है क्योंकि हमारी नीव प्राथमिक विद्यालय से पड़ती है । एक कहावत है *”जब तक नीव मजबूत नही होती है ,तब तक प्रासाद(भवन)मजबूत खड़ा नही हो सकता”* हमारा आशय है हमारी नीव उस प्राथमिक विद्यालय से ही मजबूत होती है तब जाकर हम उच्च शिक्षा ग्रहण कर पाते हैं ,और डॉक्टर , इंजीनियर, आई,ए एस ,पी सी एस ,आई पी एस और नेता , अभिनेता ,शिक्षक, पत्रकार , व्यवसायी बन पाते हैं । लेकिन हम अपना लक्ष्य पाने के बाद उस प्राथमिक गुरु *(प्राथमिक विद्यालय)* ,को भूल जाते हैं ,कि कभी हम उस विद्यालय से “क” लिखना सीखे हैं।
हमारा एक दायित्व ,एक गुरुर होना चाहिए कि हमने उस प्राथमिक विद्यालयसे पढ़कर ऐसे मुकाम को हासिल किये हैं और हमें सबसे पहले उस प्रथम गुरु *(प्राथमिक विद्यालय)* को गुरु दक्षिणा देना चाहिए ।
जिससे हमे सकून मिलेगा । और आने वाली पीढ़ी को एक सीख मिलेगी।

*प्रथम गुरु *(प्राथमिक विद्यालयो)* *को दक्षिण स्वरूप करे मदद*

हम प्राथमिक विद्यालयों से पढ़कर जीवन के उच्चतम सोपानका सफर प्रप्त करते हैं फिर भी क्या हमने कभी अपने उस प्राथमिक विद्यालयों को समय दिया जिसमें हमारी नीव मजबूत हुई । अगर हमने समय नही दिया तो कुछ भी नही किया ।
अगर हम समय नही दे पाते तो हम उस प्रथम गुरु की मूलभूत समस्याओ को देखते हुए कुछ आर्थिक दान गुरु दक्षिणा के रूप में दे सकते हैं ।
क्या आप नही चाहते कि हमारे प्राथमिक विद्यालयों में भी हमारे बच्चे कुर्सी और मेज में बैठ कर आधुनिक ब्यवस्थाओं के साथ पढ़ाई कर सके ।
यदि हम सभी अपने प्राथमिक विद्यालयों में एक -एक कक्षा को गोद ले- ले और उसकी मूलभूत समस्याओं को अवगत कराते रहे /पूरा करते रहे तो शिक्षण क्षेत्र में कभी कोई समस्या नही हो सकती है ।
हमारे अधिकारी गण हो या व्यापारी भाई जब भी आपको समय मिले कम से कम अपने उस प्राथमिक विद्यालयों की ओर जरूर रुख करें और बच्चों के साथ समय दे ताकि उन छोटे-छोटे बच्चों पर एक आशा की किरण जग सके।
आप चाहे जहाँ पर तैनात हो वही पर हप्ते में एक बार समय जरूर निकालें और उन प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के साथ रूबरू जरूर हो जहाँ से आप और हम सभी अपने लक्ष्य तक पहुँच चुके हैं।

*प्राथमिक विद्यालयो की क्या पूरी जिम्मेदारी सरकारों की ही है?*
आप देख रहे है प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापको को किसी न किसी काम पर सरकार लगा देती है जिसके कारण बच्चों को अध्यापक समय कम दे पाते है,और शिक्षण कार्य पूरा नही हो पाता है । अगर हम अवकाश लेकर अपने गांव जाते हैं या अवकाश लेकर घूमने जाते है तो कम से कम हप्ते में एक बार अपने प्राथमिक विद्यालय के लिए भी एक घंटे का अवकाश लेकर समय दे सकते हैं बच्चो को पढ़ा कर उनमे ऊर्जा भरने का कार्य कर सकते हैं।
छोटी-छोटी मूलभूत समस्याओ को भी हम पूरा कर सकते हैं ।
जैसे किसी विद्यालय में पीने का पानी खराब आ रहा है ,बच्चो की बैठने की समुचित व्यवस्था नही है पठन – पाठन हेतु आवश्यक स्थान आदि -आदि कार्य हम लोग भी करवा सकते है ,क्योकि हम सभी के ही बच्चे विद्यालयों में पढ़ रहे हैं और हमारा ही परम कर्तव्य है उनकी देखभाल करना।

अगर हम ऐसा कर सकते है तो आने वाले समय मे सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में किसी प्रकार की कोई समस्या नही रहेगी और आने वाली पीढ़ी के लिए एक मिशाल बनेगी ।

*शिक्षिक /शिक्षिका एवं समाज के लिए आत्म चिंतन*
आप सभी देखते होंगे हमारे शिक्षक भाई बहनों पर लोग तुरंत उंगली उठाते हैं , शिक्षक बच्चो को नही पढ़ाते है ।
कभी आपने सोचा है क्या कि हमने अपने बच्चों को एक घंटे का समय कभी दिया क्या ?
जिसमे बच्चो ने शिक्षण कार्य पूरा किया हो ।
नही न ….तब क्यों ..? शिक्षको पर आरोप/प्रत्यारोप लगाते हैं हम ।
*24 घंटे में 6 घंटे बच्चे विद्यालय में रहते है बाकी का समय घर मे व्यतीत करते हैं फिर क्यों …..?*
समाज के कुछ लोग शिक्षको पर आरोप लगाते हैं शिक्षक अपना कार्य नही करते पर क्यों ….?

क्या सभी शिक्षक एक जैसे हैं ,जिस तरह हमारे हाथ की सभी उंगलियाँ एक जैसी नही हो सकती ,बृक्ष की टहनी एक जैसी नही हो सकती उसी तरह सभी शिक्षक एक जैसे नही हो सकते ।
मैं शिक्षण कार्य मे संलग्न उन शिक्षक भाई बहनों से भी पूछना चाहूंगा क्या विद्यालय में समय से जाना और विद्यालय के बंद होते ही समय से वापस आ जाना ही शिक्षण कार्य है।
आपने इन 6 घंटो में बच्चों के साथ ईमानदारी से कितना समय उसको सीखने समझने हेतु दिया ?
यदि आप बच्चो को उसके बौद्धिक स्तर के साथ शिक्षण कार्य मे समय नही दे पा रहे हैं तो आपने अपने गुरु होने के नाते राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को पूर्ण नही किया ।
हमारा आपका उद्देश्य सिर्फ व्यवस्थओं पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना नही होना चाहिए बल्कि सर्वोत्तम कार्य करने वाले शिक्षक / शिक्षिकाओं का समाज मे सम्मान एवम् उनका सहयोगी बनने का प्रयास करना चाहिए तथा यथासम्भव विद्यालय के पूर्ण विकास हेतु स्वयं तथा अपने सहयोगियों से सहयोग प्रदान करवाने हेतु प्रयत्नशील रहना होगा ।
*हमारे समाज की भूमिका क्या है?*
*क्या कभी किसी ने सोचा हमारा विद्यालय कैसा हो ?*

*विद्यालय में हमारे बच्चे कैसे शिक्षा ग्रहण कर रहें हैं क्या कभी इस विषय मे भी सोच ?*

*विद्यालय एवम् शिक्षा का स्वरूप क्या है तथा उसमें हमारी भूमिका क्या है ,क्या कभी सोचा?*

*विद्यालय में हम क्या नवाचार चाहते हैं , उसके लिए हमारी ओर से क्या प्रयास है ?*

*विद्यालय में आने वाली मूलभूत समस्याओं के समाधान हेतु हमारा दृष्टिकोण क्या होना चाहिए क्या कभी विचार किया?*

*बच्चों में क्षमता संवर्धन हेतु समाज की क्या भूमिका है?*

*समाज के महत्वपूर्ण घटक होने के नाते हम क्या सहयोग कर सकते हैं ? क्या कभी सहयोग करने का प्रयास किया?*

*आप सभी को यदि मेरी यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो विचार जरूर करें , और हमारे इस मुहिम में शामिल होने के लिए इस नंबर 7905851055 पर कमेंट में लिखे ।*

मेरी इस पोस्ट से किसी भाई/बहन का मन आहत हुआ हो तो मुझे छोटा भाई समझकर माफ करियेगा ।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*आप सभी का छोटा भाई*
*सुरेन्द्र सिंह कछवाह कर्वी* *चित्रकूट*
मो0-7905851055
9670841545

apteka mujchine for man ukonkemerovo woditely driver.

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