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कृषि क्षेत्र के लिए इस बजट में कुछ नई घोषणाएँ करके अरुण जेटली ‘सूट-बूट वाली सरकार’ का दाग धोना चाहेंगे

जीएनऐ
नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए अपने बजट का पिटारा खोलेंगे। उनके इस पिटारे की ओर पूरा देश आस लगाए बैठा है। पाँच राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस बजट के लोक-लुभावन होने की संभावना ज्यादा है। हालांकि चुनाव आयोग ने सुनिश्चित किया है कि फिलहाल इस बजट में पाँच राज्यों से जुड़ी स्कीमों की घोषणाएँ नहीं की जाएंगी। केंद्रीय बजट से सबसे ज्यादा आशावान कृषि क्षेत्र है। देश के किसानों को उम्मीद है कि यह पिटारा उनकी मुश्किलों को कम करेगा।
नोटबंदी के फैसले के बाद जो तबक़े सबसे ज्यादा प्रभावित हुए उनमें किसान भी शामिल थे। फसलों की बुआई पिछड़ गई तो अभी भी समय से खाद और बीज की व्यवस्था का संघर्ष जारी है। अनाज की बिक्री को लेकर भी कोई बेहतर ढाँचागत व्यवस्था नहीं की गई है। देश का अन्नदाता आज भी तमाम मुश्किलों का सामना करता है। प्रतिवर्ष हज़ारों अन्नदाता आज भी आत्महत्या करने को मजबूर हैं। नरेंद्र मोदी कैबिनेट पर ‘सूट-बूट की सरकार’ होने के जुमले भी उछाले जाते रहे हैं। ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली 2017-18 के बजट में किसानों के लिए कुछ नई घोषणाएँ करके ये दाग धोना चाहेंगे।

पिछले बजट में किसानों को क्या मिला…?
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2016-17 का बजट पेश करते हुए किसानों के लिए फसल बीमा योजना जैसी महत्वाकांक्षी स्कीम की घोषणा की थी। फसल बीमा के लिए सरकार ने बजट में 5500 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। 9 लाख करोड़ रुपए किसानों को कर्ज़ उपलब्ध करवाने के लिए आवंटित किए गए थे। इसके अलावा सरकार ने कृषि क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की घोषणा भी की थी। सरकार ने इन घोषणाओं को अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित भी किया। इस बजट में किसानों को कुछ और बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है। पिछले बजट के कुछ प्रमुख बिंदु…
1. कृषि और किसान कल्याण के लिए कुळ आवंटन 35984 करोड़
2. देश के 28.5 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के तहत लाने की घोषणा
3. तीन वर्ष की अवधि में जैविक खेती के अंतर्गत पाँच लाख एकड़ भूमि को लाया जाना
4. नाबार्ड में समर्पित सिंचाई फंड को 20 करोड़ किया जाना
5. प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना पायलट आधार पर उर्वरक सब्सिडी के वितरण के लिए लागू किए जाने की घोषणा
6. परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को पांच लाख एकड़ लाना
बजट 2017-18 से कृषि क्षेत्र को क्या हैं उम्मीदें…?
1. केंद्रीय बजट 2017 नोटबंदी के बाद का पहला बजट है। सरकार इसमें कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के उपाय कर सकती है। पेमेंट बैंक के जरिये कामकाज पर भी बजट में राहत के उपाय हो सकते हैं।
2. नोटबंदी के बाद नकदी की कमी की वजह से बहुत से किसान अपनी फसल नहीं बेच पाए। बजट से उम्मीद है कि उन किसानों को इससे राहत देने की कोशिश की जाएगी जिनके लिए रबी सीजन निराशाजनक रहा है। ग्रामीण इलाकों में कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ प्रावधान किये जा सकते हैं। इससे किसानों के लिए खाद-बीज खरीदना आसान होगा।
3. रासायनिक के इस्तेमाल से लगातार फसलों की उर्वरक क्षमता घटती जा रही है। पिछले साल की तरह इस बजट में भी सरकार को जैविक खेती को बढ़ावा देना वाली घोषणाएं किए जाने की उम्मीद है।
4. किसानों की कर्ज़माफी के लिए सरकार क्या कदम उठाती है इस पर भी सभी की उम्मीदें होंगी।

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